भाखड़ा ब्यास प्रबन्ध बोर्ड

भाखड़ा ब्यास प्रबन्ध बोर्ड
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संगठनात्मक पदानुक्रम

बीबीएमबी क्रमश: बीबीएमबी के सिंचाई एवं विद्युत खण्डों के मुखिया, जो एक पूर्णकालिक अध्यक्ष और दो पूर्ण कालिक सदस्यों अर्थात सदस्य (सिंचाई) तथा सदस्य (विद्युत) के नेतृत्व में है। वित्तीय सलाहकार एवं मुख्य लेखा अधिकारी बोर्ड के वित्त एवं लेखा विंग के प्रमुख हैं।

सचिव एवं विशेष सचिव बोर्ड के सामान्‍य कार्यों में बीबीएमबी के अध्‍यक्ष तथा पूर्ण-कालिक सदस्‍यों की मदद करते हैं।

इसके बाद, बिजली और सिंचाई के खंडों का संगठनात्मक पदानुक्रम में आगे मुख्‍य अभियन्‍ता आते हैं, जो अधीक्षण अभियन्‍ता/निदेशक, वरिष्‍ठ कार्यकारी अभियन्‍ता/उप निदेशकों और सहायक अभियन्‍तओं के सहयोग से सम्‍बन्धित कार्यालयों के मुखिया हैं।  

  • श्री देवेंद्र कुमार शर्मा

    श्री देवेंद्र कुमार शर्माअध्‍यक्ष

    श्री देवेंद्र कुमार शर्मा

    श्री देवेंद्र कुमार शर्मा

    अध्‍यक्ष

    इंजी. देवेन्द्र कुमार शर्मा ने 21 अप्रैल, 2017 को भाखड़ा ब्यास प्रबन्ध बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में कार्यभार ग्रहण किया। इनका भारत और विदेश में ऊर्जा क्षेत्र में 35 वर्षों से अधिक का अनुभव है। इन्होंने वर्ष 1981 में इंदौर विश्वविद्यालय से सिविल इंजीनियरिंग में स्नातक की। इन्होनें एशियन प्रौद्यिगिकी संस्थान बैंकाक, थाईलैंड से जल संसाधन इंजीनियरिंग में मास्टर ऑफ इंजीनियरिंग के अध्ययन के लिए नीदरलैंड सरकार की फैलोशिप प्राप्त की। इन्होंने कनाड़ा (1987), स्वीडन (1989), हंगरी (1991), जापान (1994) तथा नार्वे (1999 एवं 2003) से जल विद्युत योजना एवं अभिकल्प इंजीनियरिंग में प्रशिक्षण कोर्स किए हैं। इन्होंने 1991 में अनुसंधान संस्थान  (VITUKI) बुडापेस्ट, हंगरी से हाइड्रोलॉजी में अन्तर्राष्ट्रीय स्नातकोत्तर कोर्स के लिए यूनेस्कों फैलोशिप प्राप्त की। इन्होंने अन्तर्राष्ट्रीय सैंटर फार हाइड्रोपावर, TRONDHEIM, नार्वें में 1999 के दौरान "जल विद्युत तथा पर्यावरण" के नोराड स्कॉलर के रूप में तथा 2003 के दौरान "एकीकृत जल संसाधन प्रबन्धन के संदर्भ में जल विद्युत विकास" पाठ्यक्रमों में भाग लिया। इन्होंने ताला पन बिजली परियोजना प्राधिकरण में कार्यरत रहते हुए जल विद्युत क्षेत्र में कार्य निष्पादन, समर्पित सेवाएं तथा सराहनीय योगदान हेतु " मैन ऑफ द ईयर" 1999 का पुरस्कार प्राप्त किया। भारत और भूटान में सरकारी क्षेत्र के लिए कार्य करने के अलावा इनके कॉरपोरेट क्षेत्र अर्थात लारसन एण्ड टूब्रो लिमिटेड के साथ पन बिजली परियोजनाओं के निर्माण तथा कम्पनी को मालिकाना स्वामित्व वाली जल विद्युत परियोजनाओं के विकास के लिए भी लगभग 6 वर्षों तक उच्च पद पर कार्य करने का अनुभव है।

         इससे पहले ये 2012 से हिमाचल विद्युत निगम लिमिटेड (हिमाचल प्रदेश सरकार का उपक्रम) के प्रबन्ध निदेशक तथा बोर्ड के सदस्य के रूप में कार्यरत थे। हिमाचल प्रदेश विद्युत निगम लिमिटेड (एचपीपीसीएल) के प्रबन्ध निदेशक के रूप में इनके ऊपर 3x65 मेगावाट कसांग जल विद्युत परियोजना को चालू कराने की जिम्मेदारी रही है और इन्होंने 100एम सेंज परियोजना पूरी की है। इन्होंने प्रणाली को जवाबदेह ओर कुशल बनाया है और एक अत्यन्त नवोदित संगठन को भारत के ऊर्जा क्षेत्र में कार्य कर रहे केन्द्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम के समान तकनीकी एवं संगठनात्मक क्षमताओं के साथ एक तेजी से विकसित हो रही विद्युत उत्पादक यूटीलिटी में परिवर्तित कर दिया है।

         ये अन्तर्राष्ट्रीय जल विद्युत एसोसिएशन और जल विद्युत क्षेत्र में कार्यरत अनेक अन्य अन्तर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय व्यावसायिक निकायों के आजीवन सदस्य हैं। राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय पत्रों में इनके 27 तकनीकी पत्र प्रकाशित हो चुके हैं।

  • श्री वी.के. कालरा

    श्री वी.के. कालरासदस्‍य (विद्युत)

    श्री वी.के. कालरा

    श्री वी.के. कालरा

    सदस्‍य (विद्युत)

    श्री वी.के. कालरा, विद्युत मंत्रालय (भारत सरकार) के अधीन जल विद्युत उत्पादन में अग्रणी संगठन भाखड़ा ब्यास प्रबन्ध बोर्ड में सदस्‍य विद्युत के पद पर अगस्त, 2015 से कार्यरत हैं। 28 मई, 1958 को जन्मे और एनआईटी कुरुक्षेत्र से इलैक्ट्रानिक्स एवं कम्यूनिकेशन इंजीनियर    श्री कालरा को विद्युत के उत्पादन, पारेषण एवं वितरण के क्षेत्र में 38 वर्ष से अधिक का अनुभव प्राप्त है।

         ये देहर बिजली घर यूनिट 6 के स्टेटर, गंगूवाल बिजली घर यूनिट 2, कोटला बिजली घर यूनिट 3 के रनरों, भाखड़ा बायां किनारा बिजली घर यूनिट 5 के जनरेटर शॉफ्ट तथा स्पाइडर को बदलने और बीबीएमबी में सौर रूफ टॉप परियोजनाओं के अधिष्ठापन में सहायक रहे। इसके अतिरिक्त ये सौर, बायोमॉस, कोजन तथा माइक्रो हाइडल परियोजनाओं से संबंधित 75 से अधिक विद्युत क्रय करार (पीपीए) हस्ताक्षरित कराने से संबद्ध रहे हैं।

         इन्हें विद्युत क्रय, विद्युत शिड्यूलिंग, विद्युत की बैंकिंग तथा विद्युत नियमन में व्यापक अनुभव प्राप्त है। इन्होंने पंजाब राज्य के लिए वार्षिक लगभग 47,000 मिलियन यूनिट विद्युत का संचलन किया है। इन्हें विद्युत विनियामक मामलों, एआरआर आंकड़ों की तैयारी, नवीकरणीय ऊर्जा के प्रोत्साहन संबंधित आरईसी तंत्र, उपभोक्ताओं, किसान यूनियनों तथा औद्योगिक एसोसिएशनों  के साथ खुली पहुँच और व्यापार में काफी अनुभव प्राप्त है।

         पंजाब राज्य बिजली बोर्ड के मुख्य क्रय अधिकारी के रूप में कार्य करते हुए ये वितरण ट्रास्फारमरों, कन्डक्टरों, इन्स्यूलेटरों, पोल्स, केबल्स तथा स्टील की थोक खरीद से जुड़े रहे हैं। इन्हें बुलडोज़रों, शंटर्स, रोलर्स, क्रशर्स, हैमर्स, कन्वेयर बेल्ट्स तथा उपभोग्य वस्तुओं की खरीद सहित बड़े भण्डारों एवं इन्वैन्ट्री का अनुभव प्राप्त है।

         कार्य स्तर पर, इन्होंने फरनैस सुरक्षा एवं पर्यवेक्षण तंत्र, वैस्टिंग हाउस डिस्ट्रीब्यूटेड प्रॉसेसिंग फैमिली सिस्टम क्लोज़ लूप एण्ड ओपन लूप ऑटो कंट्रोल्स, 210 मेगावाट बॉयलरों, टरबाइन, पम्पों, जनरेटर तथा इलैक्ट्रिकल/न्यूमेटिक कंट्रोल वॉल्वों के अनुरक्षण संबंधी कार्य किया है। इन्हें जैव चिकित्सा उपकरणों के विक्रय एवं विपणन का संक्षिप्त अनुभव भी प्राप्त है।

  • श्री एस.के. शर्मा

    श्री एस.के. शर्मासदस्‍य (सिंचाई)

    श्री एस.के. शर्मा

    श्री एस.के. शर्मा

    सदस्‍य (सिंचाई)

    श्री एस.के. शर्मा ने दिनांक 27.07.2015 को बीबीएमबी में सदस्य, सिंचाई के रूप में कार्यभार ग्रहण किया। इन्होंने पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज, चण्डीगढ़ से सिविल इंजीनियरिंग में स्नातक की और 1980 में हरियाणा सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग में उप मण्डल अधिकारी के रूप में कार्य ग्रहण किया। हरियाणा सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग में विभिन्न पदों पर कार्यरत रहते हुए इन्होंने विभिन्न नहर नियमन से सम्बद्ध ओएण्डएम तथा नए हाइड्रॉलिक संरचनाओं, पम्प-घरों, कैनाल और ड्रेनेज नेटवर्क, नाबार्ड परियोजनाओं इत्यादि की निगरानी की। इन्होंने यमुना नदी पर नदी प्रशिक्षण कार्यों को भी उत्कृष्ट तरीके से सम्भाला है और उनके कार्यकाल में बाढ़ के दौरान कोई भी दुर्घटना घटित नहीं हुई। हरियाणा सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग में कार्यरत रहते हुए इन्होंने हमेशा कठिनतम एवं अन्य संवेदनशील मामलों को भी संभाला है।

         मुख्य अभियन्ता, बीएसएल परियोजना के रूप मं कार्य करते हुए ये बीएसएल जल संवाहक प्रणाली के संचालन एवं रख-रखाव के अतिरिक्त ड्रेजर एवं सहायक कार्यों के सफल संचालन में सहायक रहे हैं।

  • श्रीमती अर्चना अग्रवाल

    श्रीमती अर्चना अग्रवालसदस्‍य, भारत सरकार

    श्रीमती अर्चना अग्रवाल

    श्रीमती अर्चना अग्रवाल

    सदस्‍य, भारत सरकार

    संयुक्त सचिव /हाईड्रो, विद्युत मंत्रालय, भारत सरकार

  • श्री पी.के. सक्सेना

    श्री पी.के. सक्सेनासदस्‍य, भारत सरकार

    श्री पी.के. सक्सेना

    श्री पी.के. सक्सेना

    सदस्‍य, भारत सरकार

    आयुक्त (सिंधु), भारत सरकार जल संसाधन मंत्रालय, नई दिल्ली।

    श्री पी.के. सक्सेना, जबलपुर विश्वविद्यालय से सिविल इंजीनियरिंग में स्नातक हैं और केन्द्रीय जल अभियांत्रिकी सेवा के अधिकारी हैं। इन्होंने वर्ष 1989 में केन्द्रीय जल आयोग में कार्य ग्रहण किया। इन्हें जल संसाधन परियोजनाओं की योजना एवं डिज़ाइन में 27 वर्ष से अधिक का अनुभव प्राप्त है जिनमें से ज्यादातर जल विद्युत क्षेत्र की परियोजनाएं हैं। ये भारत, नेपाल और अफगानिस्तान में अनेक प्रतिष्ठित जल विद्युत परियोजनाओं की डिज़ाइन से जुड़े रहे हैं। ये देश में स्नो हाइड्रोलोजी के क्षेत्र तथा जल संसाधन परियोजनाओं की निगरानी एवं मूल्यांकन से भी संबद्ध रहे हैं।

    ये एक दशक से भी अधिक अवधि से सिंधु जल समझौता 1960 से संबंधित मामलों से भी जुड़े रहे हैं और इन्होंने स्थायी सिंधु आयोग की विभिन्न बैठकों और दौरों में भारतीय पक्ष का प्रतिनिधित्व किया है।

    इन्होंने राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर के विभिन्न मंचों पर लगभग 23 शोध पत्र प्रस्तुत किए हैं।

    इस समय ये आयुक्त (सिंधु), जल संसाधन मंत्रालय, नदी विकास एवं गंगा पुनरुद्धार के रूप में कार्यरत हैं और स्थायी सिंधु आयोग सहित भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल समझौता 1960 तथा पंजाब, हरियाणा, जम्मू एवं कश्मीर, हिमाचल प्रदेश तथा राजस्थान के जल संसाधन विकास के अन्तर्राज्यीय पहलुओं से संबंधित कार्य देख रहे हैं।

  • श्री अरूणजीत सिंह मिगलानी

    श्री अरूणजीत सिंह मिगलानीसदस्‍य, पंजाब

    श्री अरूणजीत सिंह मिगलानी

    श्री अरूणजीत सिंह मिगलानी

    सदस्‍य, पंजाब

     सचिव, पंजाब सरकार
    सिंचाई विभाग, चण्डीगढ़।

  • श्री अनुराग रस्‍तोगी

    श्री अनुराग रस्‍तोगीसदस्य, हरियाणा

    श्री अनुराग रस्‍तोगी

    श्री अनुराग रस्‍तोगी

    सदस्य, हरियाणा
    मुख्य सचिव, हरियाणा सरकार
    सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग,

    मुख्य सचिवालयचण्डीगढ़

    1-  जन्म -वर्ष 1965; पिता -अवकाश प्राप्त अर्थशास्त्र प्राध्यापक; माता -10+2 ग्रहणी

    2-  स्कूल शिक्षा - सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल से 12वीं कक्षा, स्नातक शिक्षा- आई.आई.टी. रूड़की से मैकेनिकल इंजीनियरिंग

    3-  सर्विस - 2 वर्ष मिलटी् इंजीनियरिंग सर्विस (Military Engineering Service)

                -वर्ष 1990 से भारतीय प्रशासनिक सेवा (हरियाणा कैडर)

    4-  पिछले 10 वर्ष की मुख्य उपलब्धियां :-

    (i)    मौजूदा पोस्टिंग : प्रधान सचिव : सिंचाई विभाग तथा बिजली विभाग, हरियाणा (मई 2016 से अब तक)

    (a)                सिंचाई विभाग :- नहरों व लिफ्ट सिंचाई पम्प हाउसों की  सफाई व जीर्णोधार करवाकर तथा यमुना के पानी का बेहतर दोहन व प्रबन्धन कर दक्षिण हरियाणा के दुर्गम व राजस्थान से सटे क्षेत्रों में, 20-30 वर्षो बाद निरन्तर नहरी पानी पहुंचाया है।

    देश की अपने प्रकार की पहली कैनाल कमान्ड सोलर पम्प आधिरित सामूदायिक सूक्ष्म  (माईक्रो) सिंचाई परियोजना की स्थापना की है जिससे पानी बचाकर पूरे कमान्ड रकबे की सिंचाई हो सकेगी।

    (b)               बिजली विभाग  :-  पिछले वर्ष में निरन्तर प्रयासों से लाईन लोसेज 30 प्रतिशत से घटाकर 25.7 प्रतिशत किये है। जिसका परिणाम है कि आज प्रदेश कुल 203 ग्रामीण फीडरों में 24X7 बिजली उपलब्ध करा रहा है जिससे 1135 गांव लाभान्वित हुए है। लाईन लोसेज कम करके 24 घन्टे बिजली देने की शुरूवात इसी वर्ष जनवरी में की गई थी ।

    (ii)    पिछली पोस्टिंग :- (कार्यकाल 1.5 वर्ष; 2015-मई 2016)

    (a)   अध्यक्ष पौल्यूशन कन्ट्रोल बोर्ड हरियाणा (कार्यकाल 1.5 वर्ष ) के तौर पर अपने अथक प्रयासों से मैने किसी भी यूनिट या उद्योग को स्थापित करने तथा उसका ओपरेशन शुरू करने के लिए एप्लाई करने के बाद बोर्ड द्वारा फैसला करने की अवधि औसतन 90 दिन से घटा कर 22 दिन कर दी थी।

    (b)    प्रधान सचिव श्रम एवं रोजगार विभाग - देश के अधिकांश भाग में  श्रमिकों के न्यूनतम वेतन में वार्षिक वृद्वि एक पूर्व निर्धारित मल्टीप्लाईंग फैक्टर पर आधारित थी। मैने  हरियाणा में पहली बार इसे मूल्य सूचकांक से सीधा जोड़ कर लाखों श्रमिको की समस्या का समाधान किया।

    (iii)   निदेशक नगर एवं गांव आयोजना विभाग :- (कार्यकाल दो वर्ष; 2012-2014) हरियाणा प्रदेश में पहली बार एक सफल एफोर्डेबिल हाउसिंग स्कीम 2013 लागू की। नैंशनल कैपिटल रीजन के हरियाणा सब रीजन का सब रीजनल प्लान बनाया तथा एन.सी.आर. प्लानिंग बोर्ड से अनुमोदित करवाया।

    (iv)   एक्साईज एवं टैक्सेशन कमिश्नर हरियाणा (कार्यकाल 3 वर्ष; 2009-2012) सम्पूर्ण एक्साईज पोलिसी को नये सिरे से बनाया तथा टैक्स प्रणाली का सरलीकरण कर हरियाणा के कुल एक्साइज व टैक्स आमदन में 3 वर्ष की समुचित वृद्वि (72 प्रतिशत) सुनिश्चित की जो अब तक की अधिकतम है।  एरियर/रिकवरी की रेशों काफी कम कर दी ।

    (v)    निदेशक शिक्षा विभाग :- (कार्यकाल 2 वर्ष ; 2007-2009) - शिक्षकों की भर्ती में क्वालिटी लाने के लिए स्टेट टीचर एलीजिबिलटी टैस्ट आरम्भ किया । कमजोर वर्गो के छात्रों की स्कोलरशिप उनके बैंक एकाउंट में सीधे जमा करने की स्कीम बनाकर उसे लागू किया ।

    (vi)   निदेशक, सूचना प्रौदयोगिकी (आई.टी.)  :- (कार्यकाल 2 वर्ष ; 2005 -2007)

    मेरे कार्यकाल में हरियाणा ने देश में सबसे पहले स्टेट वाइड एरिया नेटवर्क (SWAN) को स्थापित किया। हरियाणा के सभी जिलों में ट्रेनिंग लैब तथा सचिवालयों में जिला e-दिशा केन्द्र व लोकल एरिया नैटवर्क स्थापित किये।  

  • श्री शिखर अग्रवाल

    श्री शिखर अग्रवालसदस्‍य, राजस्‍थान

    श्री शिखर अग्रवाल

    श्री शिखर अग्रवाल

    सदस्‍य, राजस्‍थान
    सचिव, राजस्थान सरकार, जल संसाधन विभाग,
     सरकारी सचिवालय, जयपुर।
  • श्री तरूण श्रीधर

    श्री तरूण श्रीधरसदस्य, हिमाचल

    श्री तरूण श्रीधर

    श्री तरूण श्रीधर

    सदस्य, हिमाचल
    अति. मुख्‍य सचिव(परसोनेल, एमपीपी एवं पावर, एन सी इ एस, होर्टीकल्चर ).
    शिमला, हिमाचल प्रदेश सरकार
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