भाखड़ा ब्यास प्रबन्ध बोर्ड

भाखड़ा ब्यास प्रबन्ध बोर्ड
सर्च

विद्युत खंड

विद्युत खण्‍ड

सदस्‍य (विद्युत) के पश्‍चात संगठनात्‍मक अनुक्रम में आगे मुख्‍य अभियन्‍ता आते हैं, जो अधीक्षण अभियन्‍ताओं / निदेशकों / वरिष्‍ठ कार्यकारी अभियन्‍ताओं / उप-निदेशकों तथा सहायक अभियन्‍ताओं के सहयोग से सम्‍बन्धित कार्यालय के मुखिया हैं । विद्युत खण्‍ड में निम्‍नलिखित मुख्‍य अभियन्‍ता हैं, उनका मुख्‍य अधिकार क्षेत्र / उत्‍तरदायित्‍व नीचे दी गई सूची अनुसार वर्णित है :

  • इंजी.हरमिंदर सिंह

    इंजी.हरमिंदर सिंह मुख्‍य अभियन्‍ता (प्रणाली परिचालन)

    इंजी.हरमिंदर सिंह

    इंजी.हरमिंदर सिंह

    मुख्‍य अभियन्‍ता (प्रणाली परिचालन)

    इंजी. हरमिन्दर सिंह चुघ ने पीएसपीसीएल, पटियाला से बीबीएमबी चण्डीगढ़ में दिनांक 5.7.2018 को मुख्य अभियंता प्रणाली परिचालनके रूप में कार्यभार ग्रहण किया । इनका जन्म दिनांक 5.10.1962 को हुआ । वर्ष 1984 में इन्होनें आर.ई.सी.के. (RECK) (जो वर्तमान में एनआईटी (NIT) कुरूक्षेत्र है)  से बी.एस.ई. इंजीनियरिंग (मैकेनिकल) की डिग्री प्राप्त की तथा  इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) से  विपणन प्रबंधन में स्नातकोतर डिप्लोमा प्राप्त किया । इन्होंने वर्ष 1985 में पीएसईबी (अब पीएसपीसीएल) में पदभागर ग्रहण किया । 

          पीएसपीसीएल में दिनांक 22.5.1985 से इन्हें उत्पादन,  वितरण एवं पारेषण संगठनों के सभी पहलुओं पर विभिन्‍न क्षमताओं में कार्य करने का 33 वर्षों का कुशल अनुभव प्राप्त है । पीएसपीसीएल तथा बीबीएमबी में अपने 33 वर्षों में से आज तक, 25वर्षों का उत्पादन के क्षेत्र में इनका पर्याप्त अनुभव है । अनुभवों का का विस्तृत विवरण निम्नानुसार है :-

    1. इन्होंने लगभग 3 वर्ष (1985 से 1988 तक) पीएसपीसीएल के पारेषण संगठन में सहायक अभियंता के रूप में कार्य किया, जिसमें इन्होंने योजना, निगरानी तथा पारेषण एवं उपकेन्द्रों के लिए निध‍ि आबंटन के कार्य किए  ।
    2. इन्होंने लगभग 5 वर्षों तक पीएसपीसीएल के वितरण संगठन में बतौर सहायक अभियंता के रूप में सेवा की।
    3. इन्होंने 20 वर्षों (1993 से 2012) तक गुरू गोबिन्द सिंह सुपर थर्मल प्लांट (जीजीएसएसटीपी) में विभिन्‍न पदों पर जैसे – सहायक कार्यकारी अभियंता, वरिष्ठ कार्यकारी अभियंता एवं अधीक्षण अभियंता के रूप में जी.जी.एस.एस.टी.पी. के 210 मैगावाट यूनिटों का परिचालन, पी.एल.सी. के परिचालन एवं अनुरक्षण, ड्राई फलाई ऐश की न्युमैटिक  प्रणालीकी निगरानी, एफ.एस.एस.एस. प्रणाली का परिचालन एवं अनुरक्षण, माप प्रणाली तथा जी.जी.एस.एस.टी.पी. के 210 मैगावाट यूनिटों की इंटरलॉक प्रणाली के संचालन तथा रख -रखावके महत्वपूर्ण कार्य किए हैं ।
    4. इन्होंने लगभग 1½वर्षों तक पीएसपीसीएल के निदेशक/उत्पादन के कार्यालय में बतौर अधीक्षण अभि‍यन्ता/तकनीकी कार्य किया तथा निदेशक/उत्पादन के अधीन सभी मुख्य अभियंताओं से घनिष्ठ समन्वय के साथ निर्णय लेने की प्रक्रिया में सहायता क‍ी।
    5. इन्होंने उप-मुख्य अभियंता /ईंधन, पीएसपीसीएल, पटियाला में लगभग 3 वर्षों तक कार्य किया जिसमें इन्होंने पीएसपीसीएल के सभी कोयला संयंत्रों के लिए कोयले की आपूर्ति प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई ।  पछवाड़ा सेंट्रल कोल माइन के संचालन के लिए आवश्यक मंजूरी/लाइसेंस प्राप्त करने की जिम्मेदारी संभाली। पछवाड़ा सेंट्रल कोल माइन के संचालन के लिए एमडीओ के चयन की बोली के दस्तावेजों की तैयारी/प्रकाशन की जिम्मेदारी के रूप में सेवा प्रदान की।
    6. दिनांक 3.5.2018 से 3.7.2018 तक पीएसपीसीएल मेंसीएमडी के मुख्य अभि‍यन्ता/ओएसडी का कार्य   किया । इस पद पर रहते हुए सीएमडी, पीएसपीसीएल को प्रशासनिक एवं तकनीकी मुद्दों पर सहायक प्रदान की तथा दिनांक 5.7.2018 से बीबीएमबी चण्डीगढ़ में बतौर मुख्य अभियंता सेवारत हैं । 

    उपलब्ध‍ियाँ :-

    1. जीजीएसएसटीपी में पीएलसी तथा ड्राई फलाई ऐश हैंडलिंग की न्युमैटिक प्रणाली का संचालनतथा जीजीएसएसटीपी की स्टेज-1  में ए.बी.बी. मेक  सकाड़ा आधारित इंटरलॉक प्रणाली को चालू करवाना। 
    2. कार्यकारी अभियंता (रखरखाव) के लिए उन्नत प्रशि‍क्षण कार्यक्रम में भाग लेन के लिए मार्च, 2006के दौरान केडब्ल्यूएस विद्युत तक‍नीकी ट्रेनिंग सेंटर,  जर्मनी का दौरा किया।

     

     

  • इंजी. राजेश गुप्‍ता

    इंजी. राजेश गुप्‍ता मुख्‍य अभियन्‍ता (पारेषण प्रणाली)

    इंजी. राजेश गुप्‍ता

    इंजी. राजेश गुप्‍ता

    मुख्‍य अभियन्‍ता (पारेषण प्रणाली)

    इंजी. राजेश गुप्ता ने एचवीपीएनएल, पंचकुला से दिनांक 02.04.2018 को मुख्य अभियंता/ पारेषण प्रणाली, बीबीएमबी, चंडीगढ़ का पदभार ग्रहण किया । उनका जन्म 17.02.1963 को हुआ । उन्होने रुड़की विश्वविद्यालय, ऊ.प्र (अब आईआईटी रुड़की) से वर्ष 1985 में यांत्रिक इंजीनीयरिंग में बी.ई (आनर्स) की उपाधि प्राप्त की ।

         उन्होने पीईटीएस, नागपुर में 26 सप्ताह के प्रशिक्षण उपरांत पानीपत थर्मल पावर प्लांट में सहायक अभियंता के रूप में कार्य किया । हरियाणा की पारेषण उपयोगिता एचवीपीएनएलमें उन्होने अंबाला और भिवानी जिलों में विभिन्न उपकेन्द्रों पर उपकेंद्र अभियंता के रूप में काम किया ।

         उन्होने धूलकोट स्थित स्विच गियर तथा डिस्पोज़ल डिविजन में बतौर कार्यकारी अभियंता काम किया तथा स्विच गियर मुरम्मत कार्यशाला, धूलकोट में विभिन्न विद्युत उपकरणों के रख-रखाव तथा एचवीपीएनएल की अनुपयोगी सामग्री तथा कबाड़ी के निपटान का कार्य देखा । वे एचवीपीएनएल में अनुपयोगी सामग्री तथा कबाड़ी के निपटान हेतु ई-नीलामी आरंभ करने में सहायक हुए ।

         उन्होने गुड़गाँव, रिवाड़ी तथा महेंद्रगढ़ जिलों से गठित पारेषण प्रणाली सर्कल, गुड़गाँव में अधीक्षण अभियंता के पद पर कार्य किया । अधीक्षण अभियंता/ पारेषण प्रणाली, गुड़गाँव के पद पर उन्होने लगभग 58 उपकेन्द्रों तथा 2000 सर्किट किलोमीटर पारेषण लाईनों के परिचालन एवं अनुरक्षण का कार्य देखा । इनमें 2 संख्या 400 केवी उपकेंद्र तथा उनकी सहायक पारेषण लाईनें सम्मिलित थीं। इस अवधि में उन्होने दौलताबाद (गुड़गाँव), धनोन्दा (महेंद्रगढ़) में 2 संख्या 400 केवी उपकेन्द्रों के अधोपांत (टर्नकी) निर्माण एवं चालू करने तथा 12 संख्या 66 केवी/ 132 केवी तथा 220 केवी उपकेंद्र तथा उनकी सहायक लाईनों के निर्माण कार्य का पर्यवेक्षण किया ।

         उन्होने 02.09.2015 को मुख्य अभियंता/ प्रणाली परिचालन, एचवीपीएनएल का पदभार संभाला तथा बतौर एसएलडीसी हरियाणा प्रभारी वार्षिक टैरिफ याचिका दायर करने सहित एचवीपीएनएल के सभी विनियामक मुद्दों तथा ग्रिड प्रबंधन तथा विभिन्न ओपन एक्सेस्स मुद्दों का कार्य देखा । उन्हें गैस इंसुलेटिड सब-स्टेशन (जीआईएस) के परिचालन एवं अनुरक्षण का अनुभव भी है तथा वर्ष 2013 के दौरान वे एआरईवीए (अब जीई) तथा एबीबी की निर्माण सुविधाओं पर फ्रांस और स्विट्ज़रलैंड गए। उन्हे जुलाई, 2016 में एनआरपीसी द्वारा स्पेन और जर्मन में आयोजित “कपैसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम ऑन इंटिग्रेशन ऑफ रिनयूवेबल्स इन दी ग्रिड” नामक कार्यक्रम में भी भाग लिया ।

    उपलब्धियां:

    1. 400 केवी पारेषण लाईनें जिसमें 400 केवी ट्विन-मूज तथा क्वाड-मूज लाईनें सम्मिलित थीं, के निर्माण कार्य का पर्यवेक्षण किया । गुड़गाँव शहर में मार्ग के अधिकार का गंभीर मुद्दा होने की वजह से 400 केवी उपकेंद्र दौलताबाद से 400 केवी उपकेंद्र सैक्टर 72, पीजीसीआईएल, गुड़गाँव तक क्वाड-मूज लाईन निर्माण कार्य एक चुनौती थी ।
    2. एनएच-8 को पार करने की चुनौती, 400 केवी बहुसर्किट टावर्स का प्रयोग करते हुए दिल्ली ट्रांसको लिमिटिड (डीटीएल) की मौजूदा 400 केवी क्वाड बर्सिमिस, बल्लबगढ़- बामनौली की लाईन के साथ रास्ते का अधिकार सांझा करते हुए हल की गई थी ।
  • इंजी. जीवन कुमार गुप्‍ता

    इंजी. जीवन कुमार गुप्‍ता मुख्‍य अभियन्‍ता (उत्‍पादन)

    इंजी. जीवन कुमार गुप्‍ता

    इंजी. जीवन कुमार गुप्‍ता

    मुख्‍य अभियन्‍ता (उत्‍पादन)
Back to Top