भाखड़ा ब्यास प्रबन्ध बोर्ड

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सिंचाई खण्‍ड

सदस्‍य (सिंचाई) के उपरान्‍त संगठनात्‍मक ढांचे में आगे मुख्‍य अभियन्‍ता आते हैं, जो सम्‍बन्धित कार्यालयों के मुखिया होते हैं और अधीक्षण अभियन्‍ता / निदेशक / वारिष्‍ठ कार्यकारी अभियन्‍ता / उप-निदेशक तथा सहायक अभियन्‍ता इनकी सहायता करते हैं । सिंचाई खण्‍ड में निम्‍नलिखित प्रमुख अभियन्‍ता / मुख्‍य अभियन्‍ता हैं :

  • इंजी. गुलाब सिंह नरवाल

    इंजी. गुलाब सिंह नरवाल मुख्‍य अभियन्‍ता (ब्‍यास सतलुज लिंक)

    इंजी. गुलाब सिंह नरवाल

    इंजी. गुलाब सिंह नरवाल

    मुख्‍य अभियन्‍ता (ब्‍यास सतलुज लिंक)

    डॉ. गुलाब सिंह नरवाल ने 30.06.2017 को ब्‍यास सतलुज लिंक, परियोजना भाखड़ा ब्‍यास प्रबन्‍ध बोर्ड, सुंदरनगर, हिमाचल प्रदेश  में  मुख्य अभियंता  के पद का  कार्यभार ग्रहण किया। इनका जन्म 03 मार्च 1969 को जिला हिसार हरियाणा में हुआ था। ये वर्ष 1998 में संघ लोक सेवा आयोग की अभियान्त्रिकी सेवाओं के समकक्ष परीक्षा द्वारा हरियाणा सिंचाई विभाग में अतिरिक्‍त कार्यकारी अभियन्‍ता, श्रेणी-1 के रूप में नियुक्‍त हुए। इन्‍हें वर्ष 1999 में कार्यकारी अभियंता, 2008 में अधीक्षण अभियंता और 2012 (मानी गई तिथि) में  मुख्य अभियंता के रूप में पदोन्नत किया गया। इन्होंने राजकीय बहुतकनीकी कॉलेज, झज्जर,  हरियाणा से उत्‍पादन अभियान्त्रिकी में डिप्लोमा, बीई (सिविल), बीई (अभियान्त्रिकी), एम.टेक (आईआईटी दिल्ली), एलएलबी, एलएलएम, एमबीए (ऑपरेशंस मैनेजमेंट), एम फिल (प्रबन्‍धन), एमएससी (पर्यावरण), एमएससी (कम्‍पयूटर सांईस), एमसीए, एमए (लोक प्रशासन) और पीएचडी (वनस्पति विज्ञान) किया। इन्‍हे सिंचाई और जल संसाधन, जल विद्युत परियोजनाओं में योजना, अभिकल्‍प और निर्माण का 20 वर्ष से अधिक अवधि का अनुभव है। इन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में 8 तकनीकी पत्र प्रस्तुत किए हैं तथा एकीकृत जल संसाधन प्रबंधन विषय पर वर्ष 2007 में सिंगापुर में भारत का प्रतिनिधित्व किया। ये 11 राष्ट्रीय इंजीनियरिंग संस्थानों/समितियों के आजीवन सदस्य हैं। ये इंस्टिट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) के फैलो सदस्‍य भी हैं।

     

    पैत्रिक विभाग में उपलब्धियां

                   इन्हें विभाग में उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए 3 प्रशंसा पत्र दिए गए थे। पहली बार वर्ष 2005 में निदेशक राज्य सतर्कता ब्यूरो हरियाणा ने इनकी एक साल की तैनाती के दौरान सतर्कता जांच के निपटारे के संबंध में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया था। दूसरी बार वर्ष 2008 में एडीसी के सीईओ डीआरडीए कुरुक्षेत्र द्वारा सरस्वती परियोजना की योजना और निष्पादन के लिए सम्मानित किया गया था। अति दूर लोगों के लिए पेयजल सुविधाएं प्रदान करने के लिए जिला भिवानी में उत्कृष्ट सेवाओं के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री (एमपीएचई) द्वारा वर्ष 2015 में तीसरी बार सम्‍मानित किया गया था। अपने विशिष्ट कैरियर के दौरान वे नई ऊंचाइयों तक पहुंचे और लिफ्ट नहर इकाई, यमुना जल सेवा इकाई, भाखरा जल सेवा इकाई, निर्माण इकाई और सतर्कता इकाई जैसी कई परियोजनाओं की सेवा करके विभाग को अपना योगदान दिया। अपने व्यक्तिगत प्रयासों के कारण, पानी कमांड के अंतिम सिरे तक पहुंच सका। उन्हें भाखड़ा मेन लाइन, नरवाना शाखा, पश्चिमी यमुना नहर, समानांतर दिल्ली शाखा, कैरियर लाइन चैनल, सुंदर उप शाखा, लोहरु नहर और गुड़गांव नहर जैसी हरियाणा की प्रमुख नहरों के विनियमन और रखरखाव का भी अनुभव है। इन्होंने हथनी कुंड बैराज और ताजेवाला कॉम्प्लेक्स पर भी काम किया। इन्होंने यमुना नदी पर कई नदी प्रशिक्षण कार्यों को निष्पादित किया। इन्होंने डीवाटरिंग, बाढ़ नियंत्रण, कमान क्षेत्र विकास प्राधिकरण, तालाबों के विकास और लिफ्ट सिंचाई कार्यों को भी निष्पादित किया। इन्होंने गुजरात, मध्‍यप्रदेश, महाराष्ट्र और केरल जैसे राज्यों के किसानों का दौरा करवाकर प्रशिक्षण प्रदान किया।

                   फील्‍ड में भरपूर अनुभव के अलावा, वे राज्‍य स्‍तर पर पर्यावरण, सहभागी सिंचाई प्रबन्‍ध, राज्‍य जल नीति, एकीकृत जल संसाधन प्रबन्‍धन इत्‍यादि जैसे जल संसाधन प्रबन्‍ध सम्‍बन्‍धी अनेक मामलों की नीतियों एवं दिशानिदेर्शों, कार्यान्‍वयन कार्यनीतियों तथा निगरानी एवं मूल्‍याकंन योजनाओं को तैयार करने में सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं। विधि, पर्यावरण एवं प्रबन्‍धन में शिक्षित होने से इनके दृष्टिकोण में एक नया आयाम जुड़ गया है और इसके कारण उन्‍हें जल संसाधन प्रबन्‍धन, अन्‍तर-राज्‍यीय जल सम्‍बन्‍धी मामलों, संविदाओं आदि से सबद्ध कानूनी मुद्दों को समझने में मदद मिली है। इन्‍हें विश्‍व बैंक परियोजनाओं का व्‍यापक अनुभव प्राप्‍त है, क्‍योंकि इन्‍होंने हरियाणा जल संसाधन एकीकरण परियोजना (एसडब्‍लयूआरसीपी 1994-2001) में विश्‍व बैंक के स्‍टाफ के साथ मिलकर कार्य किया और विश्‍व बैंक की नीतियों, निगरानी, पर्यवेक्षण आदि की जानकारी प्राप्‍त की तथा विश्‍व बैंक के लिए राज्‍य में मुख्‍य विशेषज्ञ व्‍यक्ति भी रहे।

    बीएसएल परियोजना, बीबीएमबी में उपलब्धियां

    1. 1986 से प्रत्‍येक वर्ष जलग्रहण क्षेत्र से पर्याप्‍त अंतरवाह रहने पर पंडोह जलाशय का फ्लशिंग ऑपरेशन किया जा रहा है। वर्ष 2018 के दौरान उपलब्‍ध डिस्‍चार्ज के एक लाख क्‍यूजेक्‍स से अधिक होने पर दो फ्लशिंग ऑपरेशंस किए गए (4811.20 + 9602.73) अर्थात 14413.93 एकड़ फीट गाद फलश् आउट की गई, जो 1986 के बाद से एक ऐतिहासिक आंकड़ा है।
    2. सुंदर नगर हाइडल चैनल बीएसएल परियोजना की जीवन रेखा है। भराई पहुंचों में चार स्थानों पर बाहरी ढलान में दलदल हो गया था तथा फिसल गया था। ढलान को तुरंत मूल डिजाइन स्तर पर बहाल कर दिया गया था।
    3. पिछले दो सत्रों के दौरान, ड्रेजिंग ऑपरेशन बिना किसी ब्रेक डाउन के बहुत ही कुशल और निर्बाध रहा है। संतुलन जलाशय में जमा गाद को न्यूनतम स्तर तक निकाल दिया गया था। ईंधन की खपत और मरम्मत शुल्क न्यूनतम रहा। अनेक नये/स़ृजनात्‍मक/अभिनव कार्य किये, ताकि मानव शक्ति, मशीनरी और फ्लोटिंग वेसल्‍स की दक्षता में सुधार हो सके, तथा ड्रेजर न्यूनतम लागत पर चलाये जा सके। संतुलन जलाशय की ढलान को साफ़ करने के लिए ड्रेजरों को पहली बार गैर-ड्रेजिंग क्षेत्र में भी प्रचालित किया था।
    4. ड्रेजर पाइपों के फैब्रीकेशन के लिए आवश्‍यक सेल हार्ड स्‍टील की पिछले दस वर्षों से अधिक समय से खरीद नहीं की गई थी। इन्‍होने इसमें व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप किया और M/S SAIL के साथ समन्‍वय किया तथा लम्‍बे समय से लम्बित मामले को हल करके स्‍टील की खरीद की। अब बीबीएमबी के पास इस स्टील की इतनी मात्रा उपलब्ध है कि अगले 2-3 वर्ष तक नंगल कार्यशाला द्वारा ड्रेजर पाइपों का लगातार फैब्रीकेशन किया जा सकता है और बीएसएल परियोजना के पास इतने पाइप होगें कि जो कि जो कम से कम अगले 30 वर्ष के लिए पर्याप्‍त होंगे।    
    5. बाई-पास टनल के भीतर जमा गाद को बाहर निकालने के लिए 3 वर्ष के बाद दिनांक 20.11.2018 को बाई-पास शूट को प्रचालित किया गया। किसी आकस्मिकता की स्थिति में पूरी प्रणाली की जांच करने के लिए द्वारों का आवधिक प्रचालन अनिवार्य है।      
    6. इन्होंने पण्‍डोह तथा सुन्‍दरनगर में स्थित बीबीएमबी जल निकायों को, विशेषकर दुर्गा पूजा और गणेश उत्‍सव जैसे त्‍यौहारों के दौरान प्रदूषण से बचाने के लिए ठोस कदम उठाये।
    7. इन्होंने वृक्षारोपण कार्यक्रमों, स्‍वच्‍छ भारत मिशन जैसी पर्यावरण संरक्षण गतिविधियों के साथ-साथ बीबीएमबी कार्यालयों में राजभाषा हिंदी को बढ़ावा देने में गहरी रूचि ली जिसके लिए माननीय अध्यक्ष ने अपने दौरों के दौरान नोट में उनके प्रयासों की सराहना की है।
    8. अपने कार्यकाल के दौरान बीबीएमबी की भूमि पर किए गए अनधिकृत निर्माण एवं अतिक्रमण हटाए गए। उदाहरण के तौर पर विरोधों के बावजूद पण्‍डोह कॉलोनी से अनधिकृत शराब की दुकान हटाई गई।
    9. स्मार्ट कलास आरम्‍भ करने, क्‍लोज़ सर्किट टीवी कैमरे लगाने और बीबीएमबी स्कूलों में अंतर-यूनिट खेल प्रतियोगिताओं को बढ़ावा देने के पीछे ये एक महत्वपूर्ण प्ररेक शक्ति रहे हैं। बीबीएमबी कर्मचारियों की प्रतिस्पर्धात्‍मक तीक्ष्‍णता को प्रोत्साहित करने के लिए बीएसएल परियोजना में अंतर-यूनिट वालीबाल टूर्नामेंट, अंतर-यूनिट शतरंज और बैडमिंटन टूर्नामेंट जैसी विभिन्न खेल गतिविधियों/कार्यक्रमों का आयोजन/संचालन भी किया गया है।
    10. ये नि:शुल्‍क चिकित्‍सा शिविरों, रक्‍तदान शिविरों के साथ-साथ स्थानीय निकायों, शैक्षिक संस्थानों, वृद्धाश्रमों तथा अनाथालयों आदि के लिए वित्तीय सहायता की व्यवस्था करने तथा समाज कल्याण कार्यक्रमों/क्रियाकलापों को आरम्‍भ करने के लिए निरन्‍तर सक्रिय रहे हैं।
    11. बीबीएमबी में इंजीनियरिंग के क्षेत्र में ज्ञान एवं कौशल वृद्धि के लिए इन्होंने वर्ष 2017 और 2018 में राष्‍ट्रीय जल अकादमी पुणे में ‘जल संसाधनों में महत्‍वपूर्ण मुद्दे’ और एकीकृत इंजीनियरिंग स्‍टाफ कालेज ऑफ इंडिया (ईएससीआई) हैदराबाद में ‘बांध सुरक्षा दिशा निदेश-बांधों की सुरक्षा के लिए निगरानी एवं संरक्षण उपाय’ से सम्‍बन्धित प्रशिक्षण में भाग लिया।

       

    उनके अध्‍ययन के सशक्‍त क्षेत्र      

                   राष्‍ट्रीय जल मिशन (एनडब्‍ल्‍यूएम) के अन्‍तर्गत सिंचाई क्षेत्र में पानी के कुशल प्रयोग को बढ़ाना, जल संसाधन के क्षेत्र में क्षमता निर्माण, जल संरक्षण, पानी की बर्बादी को कम करना और एकीकृत जल संसाधन प्रबन्‍ध (आईडब्‍ल्‍यूआरएम), राष्‍ट्रीय जल नीति 2012 के माध्‍यम से इसका अधिक न्‍यायसंगत वितरण सुनिश्चित करना, वृहद् एवं मध्‍यम सिंचाई परियोजनाओं का विस्‍तार, नवीकरण एवं आधुनिकीकरण (ईआरएम), जल निकायों की मरम्‍मत, नवीकरण एवं बहाली (आरआरआर), त्‍वरित सिंचाई लाभ योजना (एआईबीपी), जल संसाधन में अनुसंधान एवं विकास, जल अधिकार, जल बाजार, गुणकारी जल, जल प्रशुल्‍क एवं मूल्‍य निर्धारण, वाटर फूटप्रिंट, सिंचाई क्षेत्र में पीपीपी, वाटर एटीएम, प्रदूषक द्वारा भुगतान, माइक्रो सिंचाई, अधिकतम सिंचाई नियत करना, सहभागी सिंचाई प्रबन्‍ध (पीआईएम), पर्यावरण प्रवाह, पर्यावरण प्रभाव मूल्‍यांकन और पर्यावरण निगरानी योजना, जल गुणवत्‍ता के पहलू, अन्‍तर-राज्‍यीय जल विवाद, जल विनियामक प्राधिकरण, नदी घाटी संगठन, एकीकृत नदी घाटी योजना एवं प्रबन्‍ध तथा यूनेस्‍को बहुल मानदंड विश्‍लेषण, राष्‍ट्रीय जल फ्रेमवर्क कानून/बिल, जल का संयुक्‍त प्रयोग, भू-जल विकास एवं प्रबन्‍ध, वर्षा जल संग्रहण, एचईसी-एचएमएस मॉडलिंग का प्रयोग करते हुए जल-विज्ञान सम्‍बन्‍धी विश्‍लेषण, क्रॉपवाट तथा क्लिमवाट मॉडलिंग का प्रयोग करते हुए सिंचाई जल प्रबन्‍ध, आईएसएआरईजी मॉडलिंग का प्रयोग करते हुए मृदा जल संतुलन का अनुकरण, जल संसाधन तंत्र अभियांत्रिकी, जलवायु परिवर्तन, समस्‍थानिक जल विज्ञान, नवीन जल अवधारणा, जल का पुनर्चक्रण एवं पुन:प्रयोग, नदियों का अन्‍तर सम्‍पर्क, बीबीएमबी में जल का नियमन।

                   बांध सुरक्षा समिति तथा दिशा निर्देश, बांधों की सुरक्षा के लिए निगरानी एवं संरक्षण उपाय, बांध पुनर्वास एवं सुधार परियोजना (डीआरआईपी), अंतर्वाह अभिकल्‍प बाढ़ (आईडीएफ), संभावित अधिकतम बाढ़ (पीएमएफ) तथा स्पिलवे का क्षमता निर्धारण, डैमब्रेक अध्‍ययन, सैलाब मानचित्र, आपातकालीन कार्रवाई योजना (ईएपी), जलाश्‍य प्रचालन नीति, द्वार प्रचालन, बांध सुरक्षा में यंत्रीकरण की भूमिका, आपदा में रिसाव नियंत्रण सहित बांधों की बहाली, जलाशय प्रेरित भूकम्‍प का जोखिम, बांधों पर भूकम्‍प का प्रभाव, बांधों की विफलता का इतिहास, बांध सुरक्षा बिल, राष्‍ट्रीय जल विज्ञान योजना और बड़े बांधों पर अंतर्राष्‍ट्रीय आयोग (ICOLD) पत्रिका।

            अंतर-राज्‍यीय जल विवाद अधिनियम 1956, नदी बोर्ड अधिनियम 1956, स्‍थायी जल विवाद अधिकरण, सतलुज यमुना सम्‍पर्क मामला, भारतीय संविधान का अनुच्‍छेद 51ए, 131,136,143 (1) 246, 262, सूची I की प्रविष्टि संख्‍या 56 और सूची II की प्रविष्टि संख्‍या 17.   

            इनका व्‍यावसायिक सेवा रिकार्ड उत्‍कृष्‍ट, निष्‍कलंक एवं त्रुटिहीन रहा है। इन्हें एनसीसी में 'सी' प्रमाण पत्र भी प्रदान किया गया है। ये सुफी गज़लों के अच्छे श्रोता एवं गायक हैं। ये वृक्षारोपण एवं बागवानी में हमेशा व्यस्त रहते हैं। इन्‍हें यात्रा करने में आनंद आता है।

  • इंजी. राज सिंह राठौर

    इंजी. राज सिंह राठौर मुख्‍य अभियन्‍ता (ब्‍यास बांध)

    इंजी. राज सिंह राठौर

    इंजी. राज सिंह राठौर

    मुख्‍य अभियन्‍ता (ब्‍यास बांध)
  • इंजी. ए.के.अगरवाल

    इंजी. ए.के.अगरवाल मुख्‍य अभियन्‍ता (भाखडा बांध)

    इंजी. ए.के.अगरवाल

    इंजी. ए.के.अगरवाल

    मुख्‍य अभियन्‍ता (भाखडा बांध)

    ई0 अश्‍वनी कुमार अग्रवाल, मुख्‍य अभियन्‍ता ने भाखड़ा बॉंध बीबीएमबी (सिंचाई खण्‍ड) नंगल का पदभार दिनांक 27-07-2018 को ग्रहण किया । उनका सिविल इंजीनियरिंग में 35 वर्ष का अनुभव है। उन्‍होंने बी.एस.सी इंजीनियरिंग (सिविल) एवंम एम.एस.सी (स्‍ट्रक्‍चर, सिविल) इंजीनियरिंग में की है ।

              इससे पहले वह 20.10.2015 से 31.10.2016 तक अधीक्षण अभियन्‍ता सरहिन्‍द कैनाल सर्कल लुधियाना तथा 01.11.2016 से 02.06.2017 तक फिरोजपुर कैनाल सर्कल, फिरोजपुर में अधीक्षण अभियन्‍ता के रूप में कार्यरत रहे । उन्‍होंने रणजीत सागर अभिकल्‍प निदेशालय, चण्‍डीगढ़ में दिनांक 08.06.2017 से 30.04.2018 तक निदेशक के पद पर भी कार्य किया है । दिनांक 30.04.2018 को मुख्‍य अभियन्‍ता पदोन्‍नत होने पर उन्‍होंने मुख्‍य अभियन्‍ता (शोध) – कम - निदेशक (सिंचाई व बिजली) संस्‍थान अमृतसर में ज्‍वाईन किया तथा वहॉं वह दिनांक 26.07.2018 तक तैनात रहे । 

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