सिंचाई खण्‍ड

सदस्‍य (सिंचाई) के उपरान्‍त संगठनात्‍मक ढांचे में आगे मुख्‍य अभियन्‍ता आते हैं, जो सम्‍बन्धित कार्यालयों के मुखिया होते हैं और अधीक्षण अभियन्‍ता / निदेशक / वारिष्‍ठ कार्यकारी अभियन्‍ता / उप-निदेशक तथा सहायक अभियन्‍ता इनकी सहायता करते हैं । सिंचाई खण्‍ड में निम्‍नलिखित प्रमुख अभियन्‍ता / मुख्‍य अभियन्‍ता हैं :

मुख्‍य अभियन्‍ता (भाखडा बांध) ई. बलदेव सिंह
मुख्‍य अभियन्‍ता (ब्‍यास बांध)     

ई. जयदेव

मुख्‍य अभियन्‍ता (ब्‍यास सतलुज लिंक)

ई. आर. के. गर्ग



मुख्‍य अभियन्‍ता (भाखडा बांध)
Chief Engineer Bhakra Dam

ई. बी. डी. सिंह द्वारा दिनांक 03 दिसम्‍बर, 2008 को मुख्‍य अभियन्‍ता, भाखडा बॉंध, बीबीएमबी, नंगल का कार्यभार ग्रहण किया गया। इनका जन्‍म 03-04-1954 को हुआ व यह मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्‍नात्‍तक हैं। इन्‍होंने दिनांक 10-09-1978 को पंजाब सिंचाई विभाग में अस्‍थाई कनिष्‍ठ अभियन्‍ता के पद पर अपनी सरकारी सेवा आरम्‍भ की। 2008 में बीबीएमबी में आने से पहले पंजाब सिंचाई विभाग रणजीत सागर डैम, आनन्‍दपुर साहिब नहर परियोजना में इन्‍होंने उपमण्‍डल अधिकारी/सहायक अभिकल्‍प अभियन्‍ता, कार्यकारी अभियन्‍ता तथा अधीक्षण अभियन्‍ता पदों पर कार्य किया। इन्‍होंने रणजीत सागर परियोजना में अधीक्षण अभियन्‍ता (यान्त्रिक परिमण्‍डल), अधीक्षण अभियन्‍ता (निरीक्षण एवं क्‍वालिटी कन्‍ट्रोल), अधीक्षण अभियन्‍ता (प्रशासन) तथा चीफ परचेज ऑफिसर के पदों पर कार्य किया। इन्‍होंने रणजीत सागर परियोजना में अपनी डयूटी के अतिरिक्‍त उपायुक्‍त् (व्‍यस्‍थापन एवम् पुर्नवास) के पद पर भी कार्य किया। पंजाब सिंचाई विभाग व बीबीएमबी में अपने 30 साल की सेवाकाल के दौरान इन्‍होंने विभिन्‍न पदों पर कार्य किया तथा पर्याप्‍त अनुभव पाया, ये अभिकल्‍प, निर्माण, सिंचाई परियोजना के निर्माण एवं रख-रखाव, नहर निर्माण तथा इस संबंधित कार्य, हैवी अर्थ मूवी मशीनरी, गेट्स एण्‍ड गैयरिंग, सिंचाई परियोजनाओं में यान्त्रिकी स्‍थापना, मैटीरियल मैनेजमैन्‍ट, कार्मिक प्रबन्‍धन एवं प्रशासन के कुशल अनुभवी हैं। अपने कार्यकाल के दौरान सौंपे गए कार्यो को समयानुसार पूर्ण करने में इन्‍होंने अपनी नेतृत्‍व क्षमता एवम् कार्य कौशल का परिचय दिया है। इनकी रूचि पढ्ने व पूजा पाठ करने में है।

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मुख्‍य अभियन्‍ता (ब्‍यास बांध)

    ई. जयदेव ने दिनांक 04.11.2011 को मुख्य अभियन्ता, ब्यास बाँध, बीबीएमबी तलवाड़ा का कार्यभार संभाला । उनका जन्म जोधपुर (राजस्थान) में दिनांक 03.05.1954 को हुआ। 
एम.बी.एम. इंजीनियरिंग कॉलेज (जोधपुर राजस्थान विश्वविद्यालय) से सन् 1975 में सिविल इंजीनियरिंग में स्नातक की परीक्षा पास करने के पश्चात इन्होंने प्रारम्भ में राजस्थान नहर परियोजना, बीकानेर (राजस्थान सिंचाई विभाग) जिसे आज-कल इंदिरा गाँधी नहर परियोजना के नाम से जाना जाता है के नहर संरचना के डिज़ाईन का दिनांक 20.03.1976 को बतौर कनिष्ठ अभियन्ता का कार्यभार ग्रहण किया । वहाँ पदोन्नत होने पर इन्होंने दिनांक 17.08.1978 को इंदिरा गाँधी नहर परियोजना में सहायक अभियन्ता के पद का कार्यभार ग्रहण किया और जहाँ उन्हें नहर संरचना जैसे रेगूलेटर्स, फाल्स, पुलों के डिजाईन इत्यादि के कार्य पर रहे । इंदिरा गाँधी नहर परियोजना के कमांड एरिया डिवैल्पमैंट संस्थान (सी.ए.डी.) में ओ.एफ.डी. कार्यों (वाटर कोर्सिस) के अतिरिक्त इन्होंने सी.ए.डी. संस्थान में क्वालिटी कंट्रोल संबंधी कार्य भी संपादित किए । 
इन्होंने दिनांक 14.06.1988 को बतौर अधिशाषी अभियन्ता पदोन्नत होने पर सी.ए.डी. में कार्यभार ग्रहण किया और प्लानिंग तथा वाटर कोर्सिस निर्माण (ओ.एफ.डी. कार्य) जैसे विभिन्न कार्यों का निष्पादन किया । इन्होंने राजस्थान के बीकानेर तथा हनुमानगढ़ ज़िलों के क्षेत्र में इंदिरा गाँधी नहर परियोजना में रैगुलेशन, नहरों का रख-रखाव, सिंचाई बुकिंग, सिंचाई शुल्क वसूली, सतर्कता तथा गुणवत्ता नियंत्रण युनिट के कार्यों को भी सफलतापूर्वक करवाया ।
इसके पश्चात वह बतौर अधीक्षण अभियन्ता पदोन्नत हुए और दिनांक 06.07.1999 को इंदिरा गाँधी नहर परियोजना, बीकानेर के सी.ए.डी. संस्थान में गुणवत्ता नियंत्रण (सतर्कता) तथा आई.जी.एन.पी. में रैगुलेशन, नहरों का रख-रखाव, कलोनी का रख-रखाव, सिंचाई बुकिंग तथा सिंचाई शुल्क की वसूली इत्यादि कार्यों का निष्पदान करवाया ।
दिनांक 15.02.2007 को वह बतौर अतिरिक्त मुख्य अभियन्ता पदोन्नत हुए और सी.ए.डी. संस्थान हनुमानगढ़ में बीकानेर तथा हनुमानगढ़ ज़िला (सिद्धमुख नोहर सिंचाई परियोजना) (एस.एन.आई.पी.) और अमर सिंह सब ब्रांच प्रोजैक्ट (एस.एस.एस.बी.) में वाटर कोर्सिस निर्माण (ओ.एफ.डी. कार्य) से सम्बन्धित कार्य करवाए। 
ईंजी. जयदेव पुनः अपने पैतृक राज्य राजस्थान में बतौर मुख्य अभियन्ता पदोन्नत हुए और दिनांक 01.01.2008 को राजस्थान के जैसलमेर, बीकानेर, हनुमानगढ़ जिलों में आई.जी.एन.पी. क्षेत्र में तथा हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर ज़िलों में एस.एन.आई.पी., ए.एस.एस.बी. तथा गंग नहर परियोजना में वाटर कोर्सिस निर्माण कार्यों (ओ.एफ.डी. कार्य) का निष्पादन करवाया । 
जहाँ तक बीबीएमबी का सम्बन्ध है, इन्होंने अपने पैतृक राज्य राजस्थान से स्थानान्तरण होने पर मुख्य अभियन्ता, बी.एस.एल., बीबीएमबी, सुन्दरनगर के पद का कार्यभार ग्रहण किया और वहाँ पण्डोह डैम के परिचालन, सुरंगों, हाईडल चैनल, जलाश्य प्रबन्धन एवं रख-रखाव सम्बन्धी कार्यों का निष्पादन किया । इसके पश्चात इन्होंने पुनः बी.एस.एल., बीबीएमबी, सुन्दरनगर से स्थानान्तरण होने पर दिनांक 04.11.2011 को मुख्य अभियन्ता, ब्यास बाँध, बीबीएमबी तलवाड़ा का कार्यभार ग्रहण किया । 

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मुख्‍य अभियन्‍ता (ब्‍यास सतलुज लिंक)

ई. आर. के. गर्ग का जन्‍म 30.05.1955 को हुआ था। उन्‍होंने सन् 1976 में क्षेत्रीय इंजीनियरिंग महाविद्यालय कुरूक्षेत्र से बी.एस.सी. इंजीनियरिंग (सिविल) की परीक्षा उत्‍तीर्ण की। सन् 1977 में इन्‍होंने फरवरी माह में हरियाणा सिंचाई विभाग में सहायक अभियन्‍ता के रूप में कार्यभार ग्रहण किया। इन्‍होंने हरियाणा सिंचाई विभाग चण्‍डीगढ के केन्‍द्रीय डिजाईन कार्यालय में 20 वर्षों तक (1977 से 1978 एवं 1981 से 1999 तक) सहायक डिजाईन इंजीनियर के रूप में कार्य किया जिसके दौरान इन्‍होंने हैड रैगुलेटर/क्रॉस रैगुलेटर, पुल, पम्‍प हाऊस इत्‍यादि जैसे कई हाइड्रॉलिक स्‍ट्रक्‍चर डिजाईन किये। इन्‍होंने हथनी कुण्‍ड बैराज का हाइड्रॉलिक डिजाईन भी तैयार किया है। 
वर्ष 1999 में हरियाणा सिंचाई विभाग द्वारा इन्‍हें कार्यकारी अभियन्‍ता के पद पर पदोन्‍नति प्रदान की गई और इन्‍हें बी.बी.एम.बी. में तैनात किया गया। उन्‍होंने 8 वर्ष (2000 से 2008 तक) जल विनियम मण्‍डल, बीबीएमबी, नंगल में वरिष्‍ठ डिजाईन इंजीनियर के रूप में कार्य किया और इन्‍हें इनके द्वारा किए गए उत्‍कृष्‍ट कार्य के लिए अध्‍यक्ष, बीबीएमबी द्वारा स्‍वर्ण पदक प्रदान किया गया। वर्ष 2008 में हरियाणा सरकार ने इन्‍हें अधीक्षण अभियन्‍ता के पद पर पदोन्‍नत कर दिया और इन्‍होंने लगभग 3½ वर्ष तक निदेशक, जल विनियम, बीबीएमबी, नंगल के रूप में कार्य किया और लगभग 6 माह तक अधीक्षण अभियन्‍ता, पौंग बॉंध परिमण्‍डल, बीबीएमबी, तलवाड़ा के पद पर कार्य किया। निदेशक, जल विनियम अवधि के दौरान न्‍यूनतम अर्न्‍तवाह
(Inflows) (सूखे के दौरान) 2004 एवं 2009 में और वर्ष 2005, 2006, 2008, 2010 एवं 2011 के दौरान बहुत अच्‍छे अर्न्‍तवाह (Inflows) के समय इन्‍होंने बीबीएमबी अधिकारियों एवं भागीदार राज्‍यों की संतुष्टि के अनुसार जल विनियमन की व्‍यवस्‍था की। 

 

 


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